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शारदा कृष्ण

शारदा कृष्ण

  • जलम: 1957
  • jaipur

सिरैनांव कवयित्री-संपादक।

शारदा कृष्ण रौ परिचय

जन्म: 10 Aug 1957 | सादुलपुर,भारत

राजस्थानी–हिन्दी अर संस्कृत भासा माथै सांवठी पकड़ राखनवाळी लेखिका अर कवयित्री डॉ शारदा कृष्ण भारतीय महिला समाज री पीड़, संत्रास अर दोघाचिंती नै पाठका सांम्ही राखै। शारदा कृष्ण रो जलम 10 अगस्त 1957 रै बरस श्री मदनचंद जांगिड़ अर माता श्रीमती जीवणी देवी रै आंगणै सादुलशहर में हुयो। आपमें लिखण-पढ़ण री तकड़ी हूंस बाळपणै सूं देखणनै लाधै। डॉ शारदा कृष्ण एम. ए. (संस्कृत), आचार्य-साहित्य अर धरमसास्त्र रै साथै -साथै बीएड अर पीएचडी री उपाधियां हासल करी। जूण जातरा रै जुगबोध अर संघर्षां सूं सीखतां थका शारदाजी आपरै काव्य में राजस्थानी नारी री संवेदनावां अर पीड़ नै चवडै ल्यावै। कालिदास कृत प्राचीन संस्कृत ग्रंथ 'अभिज्ञान शाकुंतलम (नाटक विधा) रो करियोड़ो आपरो उल्थौ गीरबेजोग ग्रंथ है। आप इणरो उत्थौ 'शकुंतला री ओळख' सिरैनांव सूं कर'र प्राचीन चेतना अर मानवीय मूल्यां रै धरातल पर आधुनिक संदर्भा नै पाठकां साम्ही माण्ड्या है। राजस्थानी अनुवाद खेतर में 'शकुंतला री ओळख' एक धाकड़ पावंडो है।

डॉ शारदा कृष्ण री कवितावां बदळता मूल्य अर मिनखपणै री छीजती मरजाद रै ओळै-दोळै सिरजण अर रचाव रा नवा सैनाण प्रगटावै। आपरी हिन्दी कविता पोथी 'संवाद संभव' पढ़ेसरियां खातर खासी महताऊ पोथी है। राजस्थानी भासा में आपरो कविता संग्रै 'धोरा पसरियो हेत’ राजस्थानी संस्कृति अर परंपरावां री सागीड़ी ओळखाण करावै। बीसवीं सदी रै राजस्थानी महिला लेखन पैटे आपरै संपादन में 'आंगणै सूं आभो' पोथी रो प्रकासण राजस्थानी
लेखिकावां खातर नूंवी ऊरमा रो विगसाव करै। 'आंगणे सूं आभो' पत्रिको रो संपादन अर संकलण राजस्थानी लेखन संसार में महिलावां रो सागीड़ो दखल मानीज सकै।

महताऊ लेखन अर अनुवाद खातर आपनै राजस्थानी भाषा, साहित्य एवम् संस्कृति अकादमी, बीकानेर रो बावजी चतरसिंह अनुवाद पुरस्कार सूंपीज्यौ। जयपुर री संस्था द्वारका सेवा निधि कानी सूं आपरै साहित्यिक अवदान नै जावित्री जोशी महिला साहित्यकार पुरस्कार 2002 सूं आदरीज्यौ गया। अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन, मरावती रो सुभद्रा कुमारी चौहान काव्य प्रतिभा पुरस्कार, सरस्वती सम्मान 2011, मानस मराल अलंकरण 2016 सूं ई आपरी साहित्यिक साधना नै न्यारी न्यारी संस्थावां पुरस्कृत कर चुकी है। आपनै सन 2002 में राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार ई मिल चुक्यौ है।

अबार आप राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर अर केन्द्रीय साहित्य अकादमी, दिल्ली री कार्यकारिणी रा सदस्य है। श्री कल्याण संस्कृत कॉलेज, सीकर सूं सेवानिवृत्त होयां पछै डॉ शारदा कृष्ण सुतंतर काव्य लेखन अर सिरजणा में रत है। डॉ शारदा कृष्ण रो लेखन प्राचीन मध्यकालीन मूल्यां री रंगत अर जूझती जूण रै संदर्भा री संगत लैयर आगे बधै अर राजस्थानी संस्कृति रै सागण सरूप नै सैंचनण करै। हिन्दी-राजस्थानी रै मंचा पर कविता पाठ अर गोष्ठियां में आप सागीड़ा वक्ता रै रूप में जाणीजै अर आप राजस्थानी महिला लेखन री सबड़क नुमाइंदगी करै।