गीत5 रात करै रखवाळी, काटै परभात रे कतना माडूं गीत कबूतराँ को जोड़ो धान ऊग्यो धरती पै हिवड़ै हांसी कळी सारा आंसू पीग्यौ
रघुवीर प्रजापति मुकुट मणिराज किशन ‘प्रणय’ रशीद अहमद पहाड़ी सावित्री व्यास किशन लाल वर्मा राजेन्द्र सोलंकी गोरस प्रचण्ड