बंभण भाट बोलाविया राउ
भोजराज तणउ मिल्यउ छइ दिवाण
बोलइ छइ भावज छंडीय काणि
चालियउ उलगाणउ धण जाण न देइ
छंडी हो स्वामी म्हे थारी हो आस
छोड़ि नइ गोरी तूं दे मुझ जांण
चितह चमकियउ बीसल राव
देव बाघेरडइ दीयउ रे मेल्हाण
दीन्ही सोपारीयउ नइ हरखिय राय
गढ अजमेरी बसइ रे भुआल
गहिली हे मुंधि तोहि लागी छइ वाइ
हूं विरासी राजा मइ कीयउ दोस
हूं न पतीजउं गोरी थारइ वइणि
जनम मांगिउं स्वामी मारू कइ देसि
मइं छंडी हो स्वामी थारी आस
मेळ मिली तिहां हरखियउ राउ
पंडित तोहि बोलावइ रे राइ
पाटि बइठीछइ राजकुमारि
पूजियउ गणपति चाली छइ जान
सइंभरि धणीय किउं ऊलग जाइ
सात सहेलीय बइठी छइ आइ
तोरणि आवियउ बीसलराव
ऊलग जाण की करइ छै बात
ऊलग जाण कहइ धणी कउण