राजस्थानी रा चावा कवि।
इंतजार करूंला
ओ मानखो बीत्यो जावै
घर-घर री आ ही कहाणी है
बणकै देख
भटकाया
दर्द नै ओढ़णो सीख प्यारा
मै'मा नारी री
राजनीति तो गादड़ी