राजस्थानी रा चावा कवि। 'रूपमाधुरी' नांव स्यूं पोथी प्रकासित।
ओ म्हारो छोटो सो परिवार
कींनै फूरसत
हिवड़ै में सोचै गोरी
नींदड़ली कद आवै
पलकां ओट लगाय के, करल्यौ प्रीत निभाव