Anjas

ब्रह्म जयसागर

भट्टारक रत्नकीर्ति रा खास सिस्यां मांय सूं अेक।

ब्रह्म जयसागर रौ परिचय

जयसागर भट्टारक रत्नकीर्ति रा खास सिस्यां मांय सूं अेक हा अर ब्रह्मचारी रैंवता थकां धरम रौ प्रचार-प्रसार कर्‌यो। जयसागर रै जलम अर वंस बाबत घणी पुख्ता जाणकारी नीं मिळै पण औ मान्यौ जावै कै वां रौ देहांत रत्नकीर्ति  रै जीवण मांय ई हुयग्यौ हो। जयसागर घोघा नगर मांय रैंवता थकां धारमिक प्रचार-प्रचार अर साहित्य रौ सिरजण कर्‌यो। वां धरम प्रचार रै साथै दस रै लगटै गै रचनावां रौ सिरजण कर्‌यो जिणमें नेमिनाथ गीत, जसोधर गीत, चूनड़ी गीत, पंचकल्याणक गीत, क्षेत्रपाल गीत, सीतलनाथ नीं वीनती अर कैई फुटगर गीत सामल है। जयसागर री अै रचनावां आकार री दीठ सूं नैनी है पण भावां री दीठ सूं घणी सांतरी है। वां री काव्यभासा घणी सहज अर सरल है। जयसागर आपरै साहित्यिक जोगदान सारू हरमेस आदर साथै याद करीजैला।