सूती नै सपनो आवियो हे सुण सखियन ए,

सपना में देख्या घनश्याम, मोवनजी।

आंख उघड़ मुख देखिया सुण गोपियन ए,

आंसूड़ा रा लाग्या नैणां धार, मोवनजी।

कोय बता दो मेरा श्याम नै सुण सखियन ए,

देस्यां म्हारा नौसरहार, मोवनजी।

एक सखी उठ बोलिया सुण सखियन ए,

ऊभा म्हारा आंगणिया रे बीच, मोवन जी।

मोर मुगट हीरां जड़ियो सुण सखियन ए,

मोत्यां दिपै ललाट, मोवनजी।

कानां में कुंडळ ढळकता सुण सखियन ए,

मुख में मुरली बजाय, मोवनजी।

हाथां में मूंदड़ी हीरां जड़ी सुण सखियन ए,

पूंचै रतन जड़ाव, मोवनजी।

पेम ढळकती धोवती सुण सखियन ए,

पीताम्बर रा लागा लल पेच, मोवन जी।

राता रेसम री मोचड़िया सुण सखियन ए,

केसर राच्या पांव, मोवन जी।

धोळो तो घोड़ो हांसलो सुण सखियन ए,

मोत्यां जड़ियो पलाण मोवन जी।

हाथां में चटियो हीरां जड़ियो सुण सखियन ए,

मोत्यां जड़त लगाम मोवन जी।

बारां फूलां री ढालड़ी सुण सखियन ए,

सोरठड़ी रे तलवार मोवनजी।

चंद्रसखी री बीनती सुण सखियन ए,

दीन्या दुनिया नैं दरसण जाय, मोवन जी।

स्रोत
  • पोथी : चंद्रसखी भज बालकृष्ण छवि (पद संग्रह) ,
  • सिरजक : चंद्रसखी ,
  • संपादक : डॉ. मनोहर शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थान साहित्य समिति, बिसाऊ (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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