जोगी कूं कोई जिनि न्यंदौ। जहीं ठै देखो तहीं ठै बंदौ॥

महादेव थैं चाली आदि। जुगि जुगि अटल टळी समाधि॥

मछिन्द्र गोरख गुर सिष चेला। लागि धणीं सूं रह्या अकेला॥

गोपीचंद राजा भरथरी। अमर रह्या जौलौं धरतरी॥

जोगी सो जिंहिं या जुगति बणाई। वासूं लागि रहौ रे भाई॥

टीला जोगी सो करि जांणीं। जिहि धरती अम्बर मेल्हा तांणीं॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : ब्रजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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