अेक अंदेसौ मन मैं रह्यौ। मनसा बाचा रांम न कह्यौ॥
पाखंड परपंच सूं मन लायौ। साचौ रांम न कबहूं गायौ॥
लालच लोभ मोह भरपूरि। निरमल नांव रह्यौ यूं दूरि॥
गुर दादू किरपा थैं जीजै। टीला राम रसांयन रस पीजै॥