मरिये तौ धन काहे कूं करिये। औंडा ले ले क्यांहनैं धरिये॥

पातिसाह ले भर्‌या भण्डार। मरतां रती चाल्या लार॥

लीजै दीजै खाजै बांटि। सो आगां नैं थारी गांठि॥

साधां सगळां कह्यौ पुकारि। रांम बिना जिव चाल्यौ हारि॥

टीला चेति कियौ बिचार। त्यांहनैं तिरत लागै बार॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : बृजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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