जै अपराधी हूं थारौ। सकल सिरोमणि तूं साहिब म्हारौ॥

सुत औगुण केता हीं करै। पुत्र दुखी तौ माता मरै॥

सुत सोवै कहीं आवै जाइ। माता दे तौ बालक खाइ॥

माता काज कितो ही करै। चित वाहि बालिक मांहैं रहै।

टीलौ सुत माता तूं रांम। अब अैसी बिधि कीज्यौ काम॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : बृजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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