सोवन कळस पटक मणि कंगुरा मरकत मोर बुलायो

व्यांव परम सुख बिसर गयो लाडा नैण नीर भर आयो

कांपै हाथ डोर नहिं खूलै ऊधवजी बतळायो

पळ में धनस तिणां ज्यूं तोड़्यो अब क्यूं लोग हंसायो

पदम भणै प्रणवै पाय लागूं ब्यांव भलो रस आयो

स्रोत
  • पोथी : रुक्मिणी मंगळ ,
  • सिरजक : पदम भगत ,
  • संपादक : सत्यनारायण स्वामी ,
  • प्रकाशक : भुवन वाणी ट्रस्ट, लखनऊ -226020 ,
  • संस्करण : प्रथम
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