सुण हाकम संग्राम कह आंधो मत होई यार।

दो दो नेतर सबन के तेरे चहिए च्यार।

तेरे चहिए च्यार दोय देखण कूं बारै।

दोय हिया के मांहि जकां सूं न्याव निहारै।

जस अपजस रहसी अखै समै बार दिन चार।

सुण हाकम संग्राम कहै आंधो मत होई यार॥

स्रोत
  • पोथी : रामस्नेही सम्प्रदाय ,
  • सिरजक : संत संग्रामदास ,
  • संपादक : वैध केवलराम स्वामी ,
  • प्रकाशक : स्वामी केवलराम आयुर्वेद सेवा निकेतन ट्रस्ट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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