पोटा चुगती गोरड़ी, मन में राखै खोट।
पल में थापै थेपड़ी, घूंघटियै री ओट।
घूंघटियै री ओट, मांडणा भींता मांडै।
चिकणी होय सपाट, चेप कर सूरत भांडै।
धक्कै चढ़ज्या जीव, करमड़ा जागै खोटा।
फोड़ा घालै नार, ढूंढ़ती हांडै पोटा॥