साथीड़ा संसार में कळजुग वहै अरूड़,

रिसवत देवी सांच है ओर देव सब कूड़

ओर देव सब कूड़’क भगती पार नीं लागै

रिसवत पूज्यां हाथ संपदा सगळी लागै

कह काका कविराय कै इणरो परचो भारी

अूभी हाथ हजूर सो’क पूजै नर नै नारी।

स्रोत
  • पोथी : ओळमों ,
  • सिरजक : नृसिंह राजपुरोहित ,
  • संपादक : किशोर कल्पनाकांत ,
  • प्रकाशक : कल्पना लोक प्रकाशन रतनगढ़ (राज.) ,
  • संस्करण : जून
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