जसवँत गुरड़ उड्डही ताळी त्राजड़ तणेह।

हाकलियाँ ढूला हुवै पंछी अवर पुणेह॥

हुवै पँखराव जिम वीर हाकलियाँ।

थरहरै कायराँ उवर ढीला थियाँ॥

छोह करताळियाँ चिड़कला छड्डही।

अभंग जसवँत जुध गुरड़ नहँ उड्डही॥

स्रोत
  • पोथी : हालाँ झालाँ रा कुंडलिया ,
  • सिरजक : ईसरदास ,
  • संपादक : मोतीलाल मेनारिया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रन्थागार, जोधपुर ,
  • संस्करण : द्वितीय