पूजण जळवा धण गई, सरवरियै री पाळ।
नो फळ सागै हो लिया, दसुवों लटकै डाळ।
दसुवों लटकै डाळ, ज्ञान नणदूली प्यावैष।
मनस्यूं माथो टेक, ग्यारवों बेगो आवै।
सुण कर सुगणी बात, लगी या काया धूजण।
हे तिरलोकी नाथ, रोक ल्यो जळवा पूजण॥