पूजण जळवा धण गई, सरवरियै री पाळ।

नो फळ सागै हो लिया, दसुवों लटकै डाळ।

दसुवों लटकै डाळ, ज्ञान नणदूली प्यावैष।

मनस्यूं माथो टेक, ग्यारवों बेगो आवै।

सुण कर सुगणी बात, लगी या काया धूजण।

हे तिरलोकी नाथ, रोक ल्यो जळवा पूजण॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवती प्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
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