रामचरण महाराज रो कठिण त्याग वैराग।
सूतो सिंह जगावणो उडे पलीता आग।
उडे पलीता आग धार खांडा की बहणों।
काजळ का घर मांहि ऊजळा कपड़ा रहणों।
संग्रामदास जन राम का लागण दे नहीं दाग।
रामचरण महाराज रो कठण त्याग वैराग॥