म्हे सुणी बैकुंठ में बाबूड़ां रो राज

अफसरिया बैठा रहै बै करै धारिया काज

करै धारिया काज रिसवतां खूब उड़ावै

पोपां बैठी पाट पोल मे ढोल घुरावै

कह काका कविराय सुरग में जाणो चावो

तो रिसवत भेजो तुरंत सीट नै बुक करवावो।

स्रोत
  • पोथी : ओळमों ,
  • सिरजक : नृसिंह राजपुरोहित ,
  • संपादक : किशोर कल्पनाकांत ,
  • प्रकाशक : कल्पना लोक प्रकाशन रतनगढ़ (राज.) ,
  • संस्करण : जुलाई
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