फेरा लेतै फिर अफिर फेरी घड़ अणफेर।

सीह तणी हरधवळ सुत गहमाती गहड़ेर॥

गहड़ घड-कामणी करै पाणै ग्रहण।

करगि खग वाहतौ जुवा जूसण कसण॥

कौपियै छाकियै चहर भड़ अहर करि।

फुरळतै पिसण फड़ फेरवी अफिर फिरि॥

स्रोत
  • पोथी : हालाँ झालाँ रा कुंडलिया ,
  • सिरजक : ईसरदास ,
  • संपादक : मोतीलाल मेनारिया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रन्थागार, जोधपुर ,
  • संस्करण : द्वितीय