मिनख मिनख सब सारसा जांणै लोक गिंवार।
पापी पशु समान हैं भजनीक पुरुष औतार।
भजनीक पुरुष औतार जका तो मुकति सिधासी।
पापी पड़सी नरक मार जम दुवारे खासी।
एतो फरक संग्राम कह सुण लीज्यो नर नार।
मिनख मिनख सब सारसा जांणे लोक गिंवार॥