1
नाग छ काला, गँडोला कोने,
समर का घाव, फफोला कोने।
पींजरा म सिंह, सिंह तो सिंह ही सिंह—
ताण्डव सूं पछाण भोला कोने।
2
धरती को धान, डूँगर टोला कोने,
कुदाल की ताल, बाँस पोला कोने।
शुभ शहनाई पर, नृसिंहो भार —
कन्टान कवि शायर चमचा तोला कोने।
3
ज़िन्दगी खुली पोथी बाहर अन्दर कोने,
जीतो जागतो मनक, गोपी चन्दर कोने।
राज मार्ग की चमक, गाँव की पगडंडी —
चौड़े लकदरिया मेरू, बड़ला मंदर कोने।
4
धर्म धक्का सूँ चिता चढ़ादो, सींत री कोने,
या महतारी! झलकारी छ, ठीकरी कोने।
मीरा मंजीर की धुन सुण, हाल्या रावला —
या संत की धधकती धूँणी, सीकरी कोने।