छंद दूहा
महि तपै राव मालदे, बिया नखत्र बट बाट।
सुर नर सेवै पाट सह, असुरां पती सुं आट॥
छंद भुजंगी
भड़े राव गौरी दसो देस भजी। गौरी राव हूं माल मारू अगजी॥
मिळै नैण वैण न येहो अमेळौ। खेड़ेचौ करै धरा ढिली ऊखेळौ॥
मनें साही मल्ले भरै नाथि भावै। नहीं मालदे राव कांधो नवावै॥
चमर चारू छत्तर सिरै चमर चालै। हिंदू साख तेहरे तिया साथि हालै॥
यसो मालदे राव राजे मरद। हुई जेणि सामंद सातौहि हदं॥
चमू मालदे राव हंदी स चालै। घोड़ा पाखरां चाल दूणा स घालै॥
पुणै मालदे पाटि ऊदील पूर। सऊ पाटि ऊदील राजत सूर॥
राजा सूर रै पाटि गजसिंघ राजै। बसु ऊपरा जेणि रा त्रव बाजै॥
भड़े तेणि गंगा तटे भीम भजे। वळै साहिजिहान अयान बजे॥
फौजां साहगाजी फणे सेस फाटै। सुणे रुपगा दीजय गजा साटै॥
गाजिसाहि रै पाटि अमरेस गाया। मनौ ऊर्घ तै आजि ही इंद्र आया॥
छंद छप्पय
असो राव अमरेस पाटि राजा गजपत्ती।
भड़ बंका बोळगै भुजा पूजै असपत्ती॥
नगर तखत नागौर बखत मोटै बिरदाळौ।
नव कोटां नरइंद साख तेरहा सिंघाळौ॥
अवतार रूप मानव इसै करण फतै सोही करै।
पाताळ अनैं आकास पुंड भारथ जिम ऊडळ भरै॥
छंद परिजात
राजते अमर राव। सामुंदे ईंदे सुभाव॥
मेवासा गासा मरौड़। गैमरा करता गौड़॥
केकाणां जवाणा काळ। सालुळै घड़ा स बाळ॥
पाखरा सलोहा पूर। सामता रावता सूर॥
पैदळा खधारां पथ। गैज फेरै खला गय॥
बेछाड़ा कधा ऊबाड़। पहट्टा कीजै पहाड़॥
बीकाणै जोधाणै बाद। येही चलै आई याद॥
दहकै जंगळ देस। रूड़ै राव अमरेस॥
चंपै कुण धरा चम्म। खोटाळा गजाळा खम्भ॥
नागपुरै नवो निध्ध। सांपजै अस्ट सिध्ध॥
नौबत्या बाजै निहाव। बिभा रा केहौ बणाव॥
खेले गजां खंभियाण। छहु रति छक्कियाण॥
तुरंगा कुरंगा चाव। नगां ऊरंगा निहाव॥
बसै क्षित्री येहा बास। पांचाहू भड़ां पचास॥
छंद नीसांणी
मारू राव राजै अमर बाजै सदनद्दां।
बूझै माण खळा तणा धूजै सरहद्दां॥
गढ रख्खण दीयण गढां गढां कीयण गरद्दां।
जिण घरि रासा जनमिया आसा कबियंदा॥
अरक ऊजासा येहबा त्रासा तिमरदा।
अनि पोहो दीसै येहुवा जेहा वोडि रवद्दा॥
छंद छप्पय
अठ ऊभै सै एक सक संवत सुखुध।
बरस निवं व्रतमान बरणि कहि कबि सुबुंधं॥
ईख मास पख ऊजळ प्रात तथि दसै।
बार बुध नखित्र बसु सुभ जोग स घटै॥
तइतळह नाम तिण करण कही प्रथम लगन तुळ पूगियै।
अवतरे अमर धरि रायसी येक घड़ी दिन ऊगियै॥
छंद दूहा
येक घड़ी दिन ऊगिये, पुळ चालीस र च्यार।
सरद रति उजळ ससि, बिचरण गह सुं विचार॥