पाखण्ड-प्रताड़ना
दूहो
ठाया खोपा ठांण ज्यूं, पोपां री गत पाप।
भोपा कीना भोमिया, बोफा रै बहकाय॥
छन्द सबदी
गांम थळी रै गळी-गळी में, अळी-मळी ज्यूं आई।
भोपां छापल भीड़ भोमियों, पीड़ नवी प्रगटाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई भाखै भूत भोमिया भाई॥
छाळीचार खेजड़ी चडियो, पड़ियो मरतू पाई।
अबखी में पूछाया आखा, ठौड़ मूरती ठाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
हुवै कैंसर गळ्या हाडका, औरूं दम उपड़ाई।
मरियां जाय सफाखानै में, पण वांनै पूजाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
टेर पथर पड़िया टांकै में, फांसी गळै पजाई।
आपघात कर मरिया वै ई, पूजीजै पिछमाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
तन री जद आसंग तूटगी, अंग तजी उजळाई।
हाथां सूं जीरांण होमिया, किंया भोमिया कांई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
बिहूं पखां पाड़ौसी बकिया, लड़ भिड़ हुई लड़ाई।
गया बिछेड़ण मुंआ गेड सूं, थट देवळी थपाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
मोटी अेब लड़ाया मिनखां, खोटी सूंकां खाई।
रोपी मरतां पाण मूरती, भोपी करी भलाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
मांदौ डील कमाई मंदी, अमूंजणी जद आई।
भोपै घर में किया भोमिया, छळ कर छिंयां चढ़ाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
लारै भूत बैम रो लाग्यो, ठागौ करै ठगाई।
माठा करम अकल मिनखां री, भाठों में भरमाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
जो आखा पूछावै ज्यांरै, संकट रहै सदा ई।
अेक मिटै दूजो दुख उपजै, पूंछ इसी पकड़ाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
इलाज सारू देवै आडी, फाडी ढ़ोंग फंसाई।
मरै भुगत धन खोवै मूरख, होवै जगत हंसाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
भैंस सती अर चारण भोपो, सुणियां नहीं सफा ई।
औखाणो चालै आदू ओ, पण रीतां पळटाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
भोपा पणो जवानी भेळा, व्है खेळा हरखाई।
दलाल लावै माल दोवड़ौ, कमाल ठगी कराई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
चाय अमल दारू नै चिलमों, व्है मुफत री हथाई।
फोगटिया चिटकों फाऊ री, जेबों भर ले जाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
भोपी बणतां घर भरीजग्यो, ओपत हुई अजाई।
टुकड़ा नीं मिलता, घर टी.वी., मोबाइल मंगवाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
सिर कटिया जूंझ्या हित सुर भी, पूजै वै पुरखाई।
आबळ हीण मुंआ औगतिया, किण विध देव कहाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
असल रूप नै छोड आजकल, नकली फसल निपाई।
भोपौ कर ईजाद भोमिया, लख औलाद लजाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
पुलिस अदालत रै पड़ौस में, भोपौ सुण्यौ न भाई।
गांमेडू अणपढ़ गिंवार ही, कींकर देव कहाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
हाका करै पटकता हाथळ, धरै भेंट धूंपाई।
पेट भरै पाखण्ड पाळता, हरै अकल हरजाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
जाळ गूंथ जामण जाया रै, भांमण बिहूं भिड़ाई।
कुलड़ी मांय बूरिया कांमण, खुद आंगण खुदवाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
ढांणी मांय हुवै ढंग ढाळौ, भूतां चाळौ भाई।
भेड़ चाल चौफेरूं भाळौ, टाळौ कर टणकाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
नीचौ कुळ किरतब नाजोगा, तोटौ घर में ताई।
देह सूगली बड़ै देव क्यूं, सोचौ मिनख सगळाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
अस्पताळ बैंकों स्कूलों, लाखों भणी लुगाई।
किणी आज तक सुणी न क्यूं नीं, अेकर छिंयां अणाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
अणपढ़ पढ्या आदमी औरत, नेता मिलै निरा ई।
पण कोई सरपंच पंच नै, अजै नीं छिंयां आई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
मेळजोळ सूं फांसै मुरगी, झांसै में झपटाई।
थरणां कांपै जातां थाणै, जेळ हाड जरकाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
आर्य समाजी सिख ईसाई, संत पंथ सगळा ई।
कम्युनिस्ट आतंकी क्यूं नीं, थिरा भोमिया थाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
जिकै बडेरा पूजण जोगा, पांतरग्या पैलांई।
तठै अंध-विश्वास तणी, आ आंधी कींकर आई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
सुख-दुख हांण-लाभ सगळा रै, जलमै मरै जिकाई।
भोपा खुद ही मरै भुगत नै, मत भूलौ मिनखाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
च्यार दिनां ठगवाड़ौ चालै, घालै घूमर घाई।
ढळती ऊमर बिगड़ै ढाळौ, जदै पोल खुल जाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
एटम बम भूकम्प आपदा, बाढ़ गांम डुबाई।
भगदड़ मरै सैकड़ां भेळा, कुण भोमियौ कहाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
नाजायज कब्जा नगरां में, अतिक्रमण उखड़ाई।
जागैला अगली पीढ़ी जद, थड़ा मड़ा थरकाई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
सांच कहै सगतेस कवि सो, बिदग गांम बिराई।
अंतस री आंख्यां सूं ईखौ, रहै कसर नीं राई॥
भूंडी भोपां री भोपाई।
सोरठौ
प्रगट्या नह पातांह, बीस पीढ़ियां बीतगी।
आजादी आतांह, भया घरोघर भोमिया॥