सदा मरावै साह, राय कोरड़े लगावै,
कहै, देह पदमनी, जीव तब ही सुख पावै।
गढ़ के नीचे आंण, सहम भूपति दिखलावै,
लै राखै लटकाय, लोक सबही दुख पावै।
मारतें राय कायर भयौ, पदमावत देऊं सही,
भेजौ खवास मारौ न मुझ ले आवै जब लग ग्रही॥