फणि विष सरिसो लोभ यहु मिति न सुपिनै रिज्झि।
कागु करंकहं कारणै पडियउ सायर मज्झि॥
फणि विष सरिसो लोभु मित तुम लगो सुमिट्ठो।
काग कथा किणि सुणी सोजु मृतक ढोरि बइट्ठउ॥
मेघ घटा जल पूरि बेगि पंजर मैं चलियो।
वायस लोभु न तजिउ जाइ सायर महि मिलियउ॥
क्वां क्वां करंति पिक्खिवि जलधि बिनु विश्रामहं करत रहत।
भणि मान लोभ लगि विमुगध हो काग जेम वुडिवि मरत॥