करि सलांम लै नांम, क्रंम कै कारज सारंण।

करि सलांम लै नांम, सांम्य संकड़ उबारंण।

करि सलांम लै नांम, पाप जो परळै करिसी।

करि सलांम लै नांम, अंति आतमां उधरिसी।

कांम क्रोध कलोम तजि, आयो मेटि अजरि जरि।

कव तेज पयंपै जोड़ि करि, ताय धंणीय सिदक सलांम करि॥

स्रोत
  • पोथी : भारतीय साहित्य रा निरमाता : तेजोजी चारण ,
  • सिरजक : तेजोजी चारण ,
  • संपादक : कृष्णलाल बिश्नोई ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : द्वितीय
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