कहै ताम सुलतांन, वेग पदमनी बतावहु,

जहां होइ तहां कहो, जो कछु मांगो सो पावहु।

पदमन, सिंघलदीप, उदध-पै-पार, पयंपै,

देख समुद्र, सुलतान, हिया कायर का कंपै।

यूं सुनवि चढ्यौ सुलतांन, तब आय उदध ऊपर पड़्यौ,

पदमनी कहां राघव कहो, पातसाह अत हठ चढ्यौ॥

स्रोत
  • पोथी : पद्मिनी चरित्र चौपाई ,
  • सिरजक : जटमल नाहर ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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