धवल कुसुम सिणगार, धवल बहु वस्त्र सुहावें।

मुत्ताहल मणि रयण, हार ह्रिदयेस्थल भावें॥

अलप भूख त्रिस अलप, नयण बहु नींद न आवें।

आसण रंग सुरंग, जुगति सुं काम जगावें।

भगति हेत भरतार सुं, रहें अहोनिस रागणी।

कहें राघव सुलतांन सुण, पुहवी इसी हें पदमणी॥

स्रोत
  • पोथी : खुमाण रासौ (छठौ खंड) ,
  • सिरजक : दलपत विजय ,
  • संपादक : ब्रजमोहन जावलिया
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