चाबक चंचल लाइ, उलट अपने दल आवै,
नेजा लेकर हाथ, जोर दुसमन-सिर लावै।
नाठे तबहि गयंद, तोफ झीड़ा फड़ पड़ियो,
मारे मुगल अपार, बाल बादल इम लड़ियो।
खुर-खेह सूर झंपत लियो, रैन-दिवस समसिर भयो,
छुटकाय बंध, चाढ़िय तुरिय, राय भेज घर कों दियो॥