जिहि दिन वित्त आपणै तिहिं दिन मित्त कोइ।

कमला कादव बाहिरौ दिणयर वैरी होइ॥

जिहि दिण सासु सरीर लच्छि जिहि दिण थिर मंदिरि।

तिहिं दिण पुत्त फलत्त चरण सेवंत विविह परि॥

जा दिन लछि मंदिरह दिन पिय पुत्त संभालै।

दिन सासु संचरत तद्दिन रक्खै गहवालै॥

यहु चरित चतुर देखहु अधिक मान मतिग्गल इम कहै।

जदि हुति वित्त तदि मित्त सबु हो बित बिणु नर कोड़ी लहै॥

स्रोत
  • पोथी : मरु-भारती ,
  • सिरजक : जैन कवि मान ,
  • संपादक : डॉ. कन्हैयालाल सहल ,
  • प्रकाशक : बिड़ला एज्यूकेशन ट्रस्ट, पिलानी ,
  • संस्करण : अक्टूबर
जुड़्योड़ा विसै