गांव दो-फाड़ हूयग्यो छै...

एक मानै रीत नीत

दूजा गाभा खोल’र नाचै!

एक पसेव रा गीत गावै

दूजो मुफ्त री खावै!

एक मरै-पचै-खपै

अर दूजो बैठ्यो

रिपियो-रिपियो जपै।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुनियोड़ी ,
  • सिरजक : प्रमोद कुमार शर्मा
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