कटती साखावां पर सूं

आलणै नैं छोड’र

बा चिड़कली

बंद होंवती टूंटी सूंटपक तै

टबकां साथै

न्याई न्याई तावड़ी मांय

पांख फड़फड़ावै।

तद बां ईज रूंखां सूं

घणकरी-सी चिड़कल्यां

जेवड़ी खोल’र

आलणां कानी बावड़ै

पांख फड़फड़ावण नैं।

स्रोत
  • पोथी : साहित्य बीकानेर ,
  • सिरजक : कुमार श्याम ,
  • संपादक : देवीलाल महिया ,
  • प्रकाशक : महाप्राण प्रकाशन, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम
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