लाम्बी भुजावां

फैलायां

आंमी-सांमी

सूरज अर उफणती रेत

किरण्यां रै पगलिया

उतरतो

गरमावतो

आपरै ही मिजाज में

अपमत्तो

सूरज

मचंग दुपारौ!

स्रोत
  • पोथी : थार बोलै ,
  • सिरजक : भंवर भादानी ,
  • प्रकाशक : स्वस्ति साहित्य सदन
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