किस्तां में मरतै जुग मांय

हवाई कोट बरणावण

अर सपना रा घोड़ा दौड़ावरण सूं

चोखौ व्हैला

आपां चाल पड़ां अठं सूंअळगा

जिका हालात बदळ सकै

वै ई बदळ सकै

किणी रौ भाग !

नीं जिका मिमियावता रैवौ

अर खवावता रैवौ

वां डकरैल कुत्ता नै

आप रै डील री नरम बोटियां!

बदळणौ पड़सी

जुग रौ औ दस्तूर

समझणौ पड़सी

मुडदा लोग कीकर राज करै

जीवतां माथै !

बगत कदई ऊंधौ नी चालै

फगत जरूरी है

इगर मिजाज नै लखणौ

बनिस्पत के

नखां नै कुचरणौ।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच पत्रिका ,
  • सिरजक : सुधीर राखेचा ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा
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