सूतोड़ी धरती जागैला, बांध घूघरा नाचैला

गंगा री प्यास बुझावण नै, दुसमण रो खून बहावैला

सूरज नै रास दिखावण नै

रण में चक्कर चलावैला

भारत री लाज बचावण नैं,

दुसमण री नाक कटावैला–

सूतोड़ी धरती जागैला, बांध घूघरा नाचैला।

बढ़ियोड़ो जुलम मिटावण नैं,

दुसमण नै मार भगावैला

भारत सिणगार सजावण नैं,

दुसमण रै आग लगावैला–

सूतोड़ी धरती जागैला, बांध घूघरा नाचैला।

पैटण नै तोड़ गिरावण नैं,

हथगोळा चलावैला

दुसमण नैं पाठ पढ़ावण नैं,

नैटां सूं जेट गिरावैला–

सूतोड़ी धरती जागैला, बांध घूघरा नाचैला।

इण खातिर शिव भसमी रमावैला,

तांडव निरत देखावैला,

जद रण में उतरै देखीजो

दुसमण रो नाम मिटावैला

सूतोड़ी धरती जागैला, बांध घूघरा नाचैला।

स्रोत
  • पोथी : जलम भोम ,
  • सिरजक : दर्शनलाल ‘मामा’ ,
  • संपादक : मूळचंद 'प्राणेश' ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा प्रचार प्रकाशन, बीकानेर ,
  • संस्करण : 2-3, जून-दिसम्बर
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