लोगां में
अंधविस्वास
कै जठै बोलै कोचर
उजड़ ज्यावै वौ घर
सोच’र आ
घाल दिया भाटा
कोचर रै घर रूपी
खोगाळ में
पण
समझ नीं सकी कोचरी
कै घर
म्हैं उजाडू या अै मिनख।