हिवड़ै जिवड़ै रा हाल सुण, तनड़ै मनड़ै तौल।

कांई सांभळा कांई सुणा, कांई बोलां बोल॥

जबरी हूक उठै हिवड़ै में,

काया थर-थर कांपै।

नैणां उमड़्या समंद तळाव,

हिवड़ो हर-हर हांपै॥

इसी घड़ी में मिल्या सायबा, लाम्बा करगा कौल।

कांई सांभळा कांई सुणा, कांई बोलां बोल॥

सुख-दुःख दोवां ओळै-दोळै,

सुपनो बणगी जिन्दगी।

जीव जूंण सूं कैंया निकळां,

बैरी बणगी बन्दगी॥

कांई करां बगत रै आगै, माड़ा होगा डौळ।

कांई सांभळा कांई सुणा, कांई बोलां बोल॥

दुःख री कथना कथी जावै,

जीव घणो अकुलावै।

आंख्यां में आंसूड़ा खळकै,

वाणी रुंध-रुंध जावै॥

दुःख अपणो झूंपो बांध लियो, देख हियै में पौल।

कांई सांभळा कांई सुणा, कांई बोलां बोल॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : महेन्द्र सिंह मील ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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