आवो! थाँरै खातर

ढळावां हिंगळू ढोलिया

रंगावां मैंमद मोळियां

किण केयो कोई बात हुई

थे केवो दिन—तो दिन

नींतर रात हुई

थे देव!

म्है किरोडूं-किरोड़ देवळियां

थांरो प्रजातंतर

म्हां कनै डोरो

डांडो जंतर

थां माथै क्यां सूं चलावां मूठ

म्है मूढ़

थांरा करतब कोर्स में पढ़ावां

टाबरां नै दसवीं-ग्यारहवीं करावां

रोटी जैड़ी नाजोगी चीज खातर

रोवां, धिक्कार म्हांनै

पण देवतावां थानै

कद पूछसी थांरी आतमावां सवाल

कै म्हांरा कुण करिया अे हैवाल।

स्रोत
  • पोथी : सवाल ,
  • सिरजक : चेतन स्वामी ,
  • प्रकाशक : राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ, जयपुर ,
  • संस्करण : 1
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