थे नित रा करो हो फतवा जारी

बोलणियां री जीभ काट लैस्यां

सुणै उणां रा कान

लिखणियां रा हाथ तोड़ दैस्या

चालै उणां रा पग।

पोलरी बणाल्यो

थारै आं फतवां री

अेक कवि चवड़ै-धाड़ै कैवे-

म्हूं बोलस्यूं

म्हूं सुणस्यूं

म्हूं लिखस्यूं

म्हूं चालस्यूं

म्हारी छेकड़ली सांस ताईं।

स्रोत
  • सिरजक : बी एल पारस ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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