पूछूं आपसूं
सद्-ग्यान रा प्रकास में
चोखी तरां–
‘थूं कांई छै?’
जवाब देगी
थनैं थारी आत्मा खुद-ब-खुद
थूं चोळो बदळबा वाळी
आत्मा रै सिवा
छै ही कांई
अर
थूं चावै तो
सगळी स्रस्टी रो करतो-धरतो
अलख निरंजण री दांई।
थनै तन तो घणो सजायो।
पण मन नीं सजायो।
सुवारथ अर अहंकार रा राकस नै
मार नीं गिरायो, खुदा भरोसै
जिनगाणी री नाव चला’र तो देख।
लूवां रै झपीड़ां सूं झुळसी
आत्मा नै पाणी प्या'र तो देख।
जीवन आंणद सूं भर जावैगो।
समझ-समझ रो फेर छै भाया!
थूं खुद नै कदै
आइनो दिखावैगो..?