सबद नै

छोटो मती जाणो

इण में

घणी ताकत हुवै

पराया नै

अपणो बणावण री

अर अपणा नै

परायो कर

देवण री।

सबद पाणी में

लाय लगा सकै

अर लाय नै

चंदन ज्यान

सीतल बणाय सकै।

सबद आतम नै

ब्रह्म सूं

मिलाय सकै

सूतोड़ा नै

जगाय सकै

अर उकळता नै

जमाय सकै।

बरफ रे ज्यान

सबद सूखा में

तर सकै

सबद सुन्न नै

भर सकै

सबद नै

आजमाय देख लो।

सबद कांई नीं कर सकै

सबद नै छोटो मती जाणो

सबद में

घणी ताकत हुवै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कविता किरण ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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