‘सर...!

दो दिन हुग्या,

नेट (इंटरनेट) नीं रह्यो।’

‘म्हैं पापा नै पूछ्यौ

पापा…! नेट क्यूं नीं रह्यो’?

‘पापा बतायो–

मुसलमान रै लड़कै

नेट चलावणियै लड़कै नै मार दियो

जणां नेट नीं रह्यो’।

अबै कांईं ठा इण मासूम नै

अर

कुण बतावै आं नान्ही आंख्यां नै

कै कुण नेट चलावै है

अर

कुण धर्म चलावै है

इण भारत महान मांय।

स्रोत
  • सिरजक : राजदीप सिंह इन्दा ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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