पाणा नी मूरत बणी

वन-वगड़ा मअें पड़ी हं

वाट जौई र्‌यं हं

अेक अदद राम नी

कारे’क तौ आवी

उद्धार करेंगा

हुं करं भगवान अे

बइरां नो अवतार

जे आल्यौ है

आजतक हराप

झौली रई हं

गरभधारण नो हराप

पराये घेरे जावा नो हराप

जापा ना दुखावा नो हराप

जवानी मअें आदमियं नी

घूरती आंखं नो हराप

रांडीरांड थावा ना हराप

अेवा हराप अे मल्या हैं के

जीवते तौ मटवा ना न्हें हैं

राम नी वाट जौईने थाकी

ऊपर वारो लई जाअेगा

तारै’ज अणा मनखावतार

थकी छुटकौ मल है।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच ,
  • सिरजक : नयनेश जानी ,
  • संपादक : गौतम अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकाशन
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