आदमी धोखो है

लुगाई भरम

सुणो!

आदमी हो

लुगाई नै परेम करो

बीं नै ठुकराओ मती।

स्रोत
  • पोथी : राजस्थली ,
  • सिरजक : बी. एल. माली ‘अशांत’ ,
  • संपादक : श्याम महर्षि
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