ओ कुण सो सहर
जठै मिरत्यु
चोखा-फूटरा रमतियां
जेड़ी इणगी-उणगी लटकै
उणियारै माथै
देवां-राखसां रा होकड़ा
बिरथा बंतळ
फालतू सवाल
सांपां री तरिया
बिलां मांय बड़ता बिचार।
कै म्हैं होय गयौ हूँ चमगूंगो
जो ओ
समंद सूयग्यौ
सांत अर छोळां रहित
उण रै तट माथै
कई लागोड़ा सिलालेख
झेरां खावै।
उणारै बिचाळी
भायला-भायली
म्हलां रो उणमाद खिंडावै ओ बापड़ो सहर
निरबळ रैय नै
सांच हेतु
लटकाय देवै सूळी माथै ईसामसी री तरियां
खरो हेलो,
कूड़ो कसूर
चारूंमेर खाकी अजगर
सांस लेवता छोडै जै’र।
सच्ची ओ सहर
खुद सूं जूझतो लड़तो
हुयग्यो है घायल, मांदो।