कुण सो सहर

जठै मिरत्यु

चोखा-फूटरा रमतियां

जेड़ी इणगी-उणगी लटकै

उणियारै माथै

देवां-राखसां रा होकड़ा

बिरथा बंतळ

फालतू सवाल

सांपां री तरिया

बिलां मांय बड़ता बिचार।

कै म्हैं होय गयौ हूँ चमगूंगो

जो

समंद सूयग्यौ

सांत अर छोळां रहित

उण रै तट माथै

कई लागोड़ा सिलालेख

झेरां खावै।

उणारै बिचाळी

भायला-भायली

म्हलां रो उणमाद खिंडावै बापड़ो सहर

निरबळ रैय नै

सांच हेतु

लटकाय देवै सूळी माथै ईसामसी री तरियां

खरो हेलो,

कूड़ो कसूर

चारूंमेर खाकी अजगर

सांस लेवता छोडै जै’र।

सच्ची सहर

खुद सूं जूझतो लड़तो

हुयग्यो है घायल, मांदो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : यादवेन्द्र शर्मा ‘चंद्र’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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