नीं तो कोई नक्सौ

अर नीं कुतुबनुमा

पण फेरूं

साईबेरिया सूं बईर हुयोड़ा पंछीड़ा

पंखा रै पतियारै

अर हिम्मत रै पाण

केवलादेव पूग जावै

नीं तो भटकै अर नीं कठैई अटकै

कित्तो भरोसो है वां नैं

आपरै सुभाविक ग्यान माथै।

इणी तरै नदी, नदी नै

आपरै ठोड़-ठिकाणै रो ग्यान है

मारग री विगत नै

वा पिछाणै, जाणै कै

भाखरां री छाती नैं चीर’र

मैदानां में बैंवती-बैंवती

उणनै गंगोत्री सूं लेय’र

गंगासागर तांई पूगणो है

बगतसर ढूकणो है।

कुदरत रै हाथां री ओळयां

यूं नीं मंडीजै

वां नैं आपरी मरजादा में

रैवणौ पड़ै है

नदी री तरियां बैवणो पड़ै है।

स्रोत
  • पोथी : राजस्थली ,
  • सिरजक : सुमन बिस्सा ,
  • संपादक : श्याम महर्षि ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी साहित्य संस्कृति पीठ
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