पढ़ी लिखी बीनणी
अंगूठै छाप सासू नै
ग्यान का घूंट प्यावै ही।
मनेजमेन्ट कोर्स की पोथी का
बीनै सारा गुण बतावै ही
थानै के बेरो
कईयां लेबरां सैं
काम लियो जावै है।
थारी ही निजरां कै स्यामनै
सुसरैजी, बिना खटै ही खावै है।
आंकी या गो स्लो स्ट्राइक
आपणों भठ्ठो बैठा देसी
रोजिना आंकै मेडिकल बिल को
भुगतान कुण देसी।
ये ड्यूटी तो बजावै कौनी
खाली अल.टी.सी. की
रट लगा राखी है
गैलड़ी साल तो
बृन्दावन गया था
अब कै हरिद्वार की
जचा राखी है॥
काल ही कवै था
युनीफार्म पुराणी होगी
नई सिमाद्यो।
पैलड़ी कामळ में
सैकड़ी कोजका होगा
दूसरी मंगाद्यो
ईं फीजूल खर्ची सैं
बैलेन्स सीट बिगड़ जावैगी
जद ये कुल रीटायर होवैगा
कफन काठी कठै सैं आवैगी
सासू बोली बेटी।
मेरा मां बाप तो मनै
या विद्या पढ़ाई कोनी
गृहस्थी भगवान को मन्दिर होवै
ईं सैं ज्यादा समझाई कोनी
अब तूं पढ़ी लिखी
अैं घर में आयी है
मैं तो इतणो ही समझु हूं
अब जाणै में ही भलाई है॥