म्हैं बावळी

सनैव नै जोवती रैयी..!

आपणा-परायां

सगळां कनै सूं माग्यौ ई,

पईसां री कमीं नीं ही

दुकानां...माल...

अठै तांई कै बिदेसां सूं

मोलावण खातर

घणी खेचळ करी..!

बीज मांग्या

सोच्यौ-उगाय लेस्यूं

पण नीं मिल्या..!

जीव में आयौ–

घणौ नीं तो चिन्यो-सो

मिल जावतो तो..!

कांईं भगवान थारै घरां

सनैव रो टोटो पड़ जावतो?

भगवान बोल्या-

बायां– 'प्रेम नीं बाड़ी नीपजै

हेत नीं हाट बिकाय..!'

स्रोत
  • सिरजक : बसन्ती पंवार ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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