जिया जूण तो जागी बाळा नीसरग्यो क्यूं राम।
उठो! मन जाग्यां सरसी काम॥
प्यालां पर निछरावळ दीठी।
नख शिख रेख काजळी दीठी।
पंथीड़ो मृग जळ में फसर्यो दूर मोकळो गाम।
उठो! मन जाग्यां सरसी काम॥
साथीड़ा तो कदस्यूं जाग्या,
मोतीड़ा बै चुगबा लाग्या।
अरे! हंसला रह्यो अेकलो भावै क्यों बिसराम।
उठो! मन जाग्यां सरसी काम॥
बीती रात नयो उजाळो,
नींदड़ली सूं प्रीत न पाळो।
पळट्यो जमानो दुनिया मुळकै बंध गई थारी झाम।
उठो! मन जाग्यां सरसी काम।
बाहर कस्योड़ो घुड़लो हींसै,
ढोल त्रंबाला तूरियां चीसै।
रीठक मचग्यो बिक रे जीवड़ फिर के बटसी दाम।
उठो! मन जाग्यां सरसी काम।
रात जात सब जाती दीसै,
बांधूड़ा कण-कण रा दीसै।
आंसूड़ा आंख्यां में अटक्या अब हिवड़ा पग थाम।
उठो! मन जाग्यां सरसी काम॥